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शहीद चन्द्रभान

अमर शहीद चन्द्रभान का संक्षिप्त जीवन परिचय


अमर शहीद चन्द्रभान का जन्म सन्‌ 1919 को उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद के ग्राम दबथुआ में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री रामस्वरुप व माता का नाम श्रीमति अनारों देवी था ये तीन भाई थे इनके सबसे छोटे भाई का नाम श्री ओम प्रकाश गुप्ता था, जो स्वतंत्रता सैनानियों के लिये कार्य कर रही संस्था शहीद चन्द्रभान स्मारक समिति मवाना मेरठ के अध्यक्ष रहें हैं। सन्‌ 1937 में श्री चन्द्रभान के माता-पिता मेरठ जनपद की मवाना तहसील के ग्राम मुबारिकपुर में अपनी सुसराल में परिवार सहित आकर रहने लगे। इनके पिता देश भक्त थे तथा अपने बच्चों को देश के लिये मर-मिटने का सबक सिखाते रहते थे। अपने माता-पिता से प्रेरणा लेकर शहीद चन्द्रभान गुप्ता राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी द्वारा शुरु किये गये भारत छोड़ो आन्दोलन में कूद पड़े। देश भर में भारत छोड़ो आन्दोलन शुरु होने की घोषणा होते ही अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ पदाधिकारी या तो गिरफ्तार कर लिये गये भूमिगत हो गये। जिसका प्रभाव मेरठ में भी पड़ा। मवाना में भी इस आन्दोलन की कमान श्री ठाकुरदास, ठाकुर रुमाल सिंह व नौजवान चन्द्रभान के हाथों में थी।

मवाना में 9 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आन्दोलन शुरु हो गया। 9 अगस्त में विशाल जूलस निकाला गया। जिसमें आम जनता के साथ-साथ सेकड़ों विद्यार्थियों ने भाग लिया। यह जूलूस बाजार से होते हुए नगर पालिका के मैदान पर पहुंचा तो तत्कालीन थानाध्यक्ष जुल्फिकार अली ने फायर किया तथा निहत्थे जवानों पर जमकर लाठी चार्ज किया जिसमें सेकड़ों आजादी के मतवाले घायल हो गये। जिससे आन्दोलनकारियों में आक्रोश व्याप्त हो गया तथा इस लाठी चार्ज का बदला लेने का निर्णय लिया गया।

आजादी के मस्तानों ने दस अगस्त 1942 को नगर में पुनः एक विशाल जूलूस निकाला थाने के सामने जमकर नारे बाजी की लेकिन इस बार अंग्रेजी पुलिस ने थाने के मुख्य द्वार को बंद कर दिया। जिस पर आजादी के मतवालों ने अंग्रेज पुलिस से बदला लेने के हेतु 16 अगस्त 1942 का दिन तय किया। 16 अगस्त को दिन निकलते ही मवाना नगर व देहात से आजादी के सिपाही ए. एस. इण्टर कॉलेज के मैदान में एकत्रित हो गये। ए. एस. कॉलेज के मैदान में 20 हजार लोगों की भीड़ को देखकर अंग्रेज पुलिस ने मेरठ से सहायक पुलिस अधीक्षक ग्लैन को पांच दर्जन हथियार बंद सिपाहियों के साथ बुला दिया। भीड बिलकुल शान्त थी तत्कालीन थाना अध्यक्ष जुल्फिकार ने हवा में फायर कर दिया। जिससे भीड  में भगदड  मच गयी तथा नौजवान चन्द्रभान ने जुल्फिकार पर हमला बोल दिया। जिस पर सहायक पुलिस अधीक्षक ग्लैन ने चन्द्रभान को गोली मार दी। जिससे नौजवान चन्द्रभान भारत माता की जय-जयकार करते हुए शहीद हो गये। चन्द्रभान के शहीद होने पर निहत्थे आन्दोलनकारियों ने अंग्रेज पुलिस की गोलियों का मुकाबला लाठियों से किया।


शहीद चन्द्रभान की स्मृति मे मवाना मे तहसील रोड पर एक वाटिका बनाई गयी है। इस वाटिका की खस्ता हालत को देखते हुए नगर पालिका परिषद ने इसमें दस लाख रुपये की लागत से विकास कार्य करवाये है।

शहीद चन्द्रभान की याद में मवाना में सन्‌ 1982 में शहीद चन्द्रभान स्मारक समिति का गठन पूर्व डी. एस. पी. स्वतंत्रता सैनानी ठा रुमाल सिंह ने किया था। उनकी याद में इस समिति के तत्वाधान व स्वतंत्रता संग्राम सैनानी परिषद तहसील मवाना के संरक्षण में तहसील रोड पर नगर पालिका के पास शहीद चन्द्रभान द्वार बनाया गया था। यह समिति सन्‌ 1982 से चन्द्रभान की याद में मवाना के तहसील रोड़ पर 16 अगस्त से 15 सितम्बर तक एक माह का मेला भी लगाती है। जिसे दूर-दराज से हजारों लोग देखने आते है। मेला हर वर्ष अपने स्वरुप को बढाता जा रहा है।


शहीदों की मजारों पर लगेगें हर वर्ष मेले ।
वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा ॥